याद आते हैं लुधियाना वाले तिरंगा प्रेमी डाक्टर भारत
लुधियाना>15 अगस्त 2026>रेक्टर कथूरिया//मुझे याद है ज़रा ज़रा........!
आज 15 अगस्त है न। स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार। डाक्टर भारत 15 अगस्त के साथ साथ महात्मा गाँधी जी का बलिदान दिवस भी मनाते। फिर शशीद भगत सिंह के साथ साथ पाश का शहीदी दिन भी मनाने लगे। उनके विचारणा का दायरा विशाल होता जा रहा था। उनके दोनों कम्प्यूटरों में आज फिर से सामने आ रही हैं 9 बरस पुरानी यादें। मीडिया पर हमले बढ़ने लगे थे। लोकतान्त्रिक मूल्यों पर फिर से खतरे मंडराने लगे थे। उस समय इस पर चिंतन मनन करने के लिए कुछ पत्रकार मिल बैठे। यह जगह थी आरती सिनेमा के सामने की तरफ सड़क पार कर के बना हुआ डाक्टर अमरजीत कौर हाल। पुरानी यादे आती हैं तो बहुत कुछ याद दिलाती हैं
वास्तव में यह एक ऐसी इमारत का हाल था जहां किसी समय डाक्टर अमरजीत कौर जी की देख रेख में एक बहुत ही अच्छा अस्पताल संचालित हुआ करता था। जिस इमारत में जहाँ कभीयह प्रसिद्ध अस्पताल चला करता था वहीँ पर फ्यूचरा कम्प्यूटर के नाम का केंद्र भी था। उस समय कंप्यूटर क्रान्ति
इस मीटिंग के आयोजन में जो उत्साही लोग सक्रिय थे उनमें डाक्टर भारत भी थे। एक पत्रिका के संपादक अरुण शर्मा जो कई बार अरुण कौशल के नाम से भी लिखते हैं। पीपुल्स मीडिया लिंक की इस बैठक में समाज सेवा में अग्रणी रहने वाले तर्कशील जसवंत जीरख, नौजवान अरुण कुमार, जश्न संघर्षों के साथ अक्सर जुडी रहने वाली युवा समता, बढ़ती उम्र के बावजूद जोश में रहने वाले कामरेड सुरिंदर सिंह ढिल्लों, कामरेड रमेश रतन, बेलन ब्रिगेड नामक जोशीले संगठन का संचालन करने वाली अनीता शर्मा, जानेमाने पत्रकार एम/ एस भाटिया, मैडम संदीप शर्मा, सतीश सचदेवा, कार्तिका सिंह, दिलजोत कौर शीबा सिंह, प्रदीप शर्मा इप्टा और, ओंकार सिंह पूरी भी शामिल रहे। तब से लेकर अब तक पत्रकारिता पर खतरों के बादल बढ़ते ही जा रहे हैं।
इस आयोजन का आशीर्वाद और प्रोफेसर जगमोहन सिंह रहे जो शहीद भगत सिंह के भांजे हैं। इस यादजारी सुअवसर पर वैचारिक क्रांति के अभियानों में अग्रणी रहने वाले युवा पत्रकार दीप जगदीप सिंह भी रहे। वह अपनी कलम और चढ़दीकला वाली भावना की अपनी शक्ति बना कर आज भी लगातार सरगर्म हैं। मुझ पर स्वास्थ्य का गंभीर संकट छाया तो शायद हो कोई दिन था जब दीप जगदीप से सिंह बहुत गंभीरता सेहत का हाल चाल न पुछा हो और आर्थिक हालत के लिए हाथ न बढ़ाया हो।
खैर इस आयोजन को अब मेरी उम्र और बुढ़ापे के चलते अब काफी देर हो गई है। जिस्म जवाब देने लगा है। कंधें और घुटने भी साथ छोड़ने जैसी बातें कर रहे हैं। शायद बुढ़ापा आना ही था। जब भी शरीर हरने लगता है या मन तब प्रोफेसर जगमोहन सिंह का बताया पीली मेथी केदाने भिगो कर सुबह उनका पानी पीने का गुर याद आ जाता है। लेकिन इसके साथ ही हमारा प्रयास है कि उस समय की वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तस्वीरें भी तलाश की जा सकें और साथ ही उस समय रखे गए प्रस्ताव भी। जिन्हें सहेजने के ज़िम्मेदारी पत्रकार सतीश सचदेवा ने निभाई थी लेकिन जल्द ही वह बच्चों के पास कैनेडा चले गए। उस अंतराल में बहुत सा रिकॉर्ड भी इधर उधर हो गया। डाक्टर भारत ने नए नए उठ रहे उन भी खतरों से उस समय भी आगाह किया था।
यह वियोगात्मक इतफ़ाक़ ही था कि डाकटर भारत उस के बाद ज़्यादा देर तक हमारे दरम्यान नहीं रहे। डाक्टर भारतर के बाद उनके नज़दीकी और वृद्ध मित्र ओंकार पूरी भी चल बसे. डाक्टर भारत का एक सपना था कोई सत्ता ये सियासी पार्टी समाज को बचाने के लिए कुछ करे या न करे लेकिन हम अपने मित्रों की मंडली ज़रूर कुछ करेगी। उन्होंने सं 1998 में प्रसिद्ध हिंदी फिल्म चाईना गेट केआधार पर अपनी टीम का नाम भी चाईना गेट रख छोड़ा था।
आंखें थकने लगी हैं। कुछ समय पहले प्रसिद्ध गांधीवादी नेता हिमांशु कुमार जी पीजीआई चंडीगढ़ में अपनी आंखें दिखाने आए तो उन्होंने भी स्वास्थ्य को बनाए रखने के कुछ गुर बताए और शाकाहार को निरोगता का बहुत महत्व पूर्ण अंग भी बताया। बहुत सी और बातें भी ज़हन में आ रही हैं। जल्द ही उनकी चर्च अभी करूंगा। आप सभी मित्रों को भी बहुत कुछ याद होगा। जो याद आता है कृपया लिखते रहिए। यह वार्तालाप मेरेजाने के बाद आपको फिर से बहुत कुछ यद् दलाएगा। अतीत को लौटा लाएगा बेशक थोड़े समय के लिए ही सही। आपके विचारों और तस्वीरों की भी इंतज़ार है। स्वागत रहेगा ही।
फ़िलहाल थक गया हूँ- विदा चाहता हूँ।
स्नेह और सम्मान के साथ,
रेक्टर कथूरिया
पोस्ट स्क्रिप्ट: शायद 74 वर्ष की उम्र एक और मित्र तथा जान नायक स्मॉलक सिंह भी याद आ रहे है जिन्हें पंजाबी भवन में मई मैं दिवस की रात को लगातार काम करते देखा ,,,,,,, वह भी नई ऊर्जा देते हैं उन पर चर्चा जल्द ही बहुत सी बातें हैं उन के बारे में
