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लेकिन हर चुनौती के सामने डटे रहना-पीछे मत हटना
खरड़ (मोहाली) चंडीगढ़:10 जनवरी 2025: (मीडिया लिंक//आर के तारेश//यादें//मुझे याद है ज़रा ज़रा))::
ज़िंदगी की हर सुबह कई बार उमीदों से भरी होती है और कई बार निराशा के अंधेरों से। जिस दिन उम्मीद रौशन होती है उस दिन तन मन में एक उत्साहपूर्ण उड़ान उठने लगती है। जिस दिन निराशा का अंधेरा हो उस दिन बिस्तर से उठने का भी मन नहीं होता। बस यही लगता है कि उठ कर भी क्या करेंगे? कहां जाऐंगे? निराशा वाले दिन उठना भी पड़े तो बस मजबूरी में ही उठना होता है। इसके कारणों पर सोचा तो बहुत सी बातें मन में आईं। इस चिंतन में चलते चलते ज्योतिष के नज़रिये से ग्रह चाल देखने का भी मन किया। बात उठी दिमाग में भी और मन में भी। मन की बात तो ठीक लगती पर इस चाल को देखने और समझने की अक्ल कहां से लाते? ज्योतिष के ज्ञान विज्ञान को समझना समझाना इतना सहज भी नहीं होता।
ग्रह चाल पर दृष्टि डालने के लिए कुछ जानकार मित्रों से भी चर्चा की और गूगल बाबा से भी गुजारिश की। बहुत पहले एक विद्वान मित्र हुआ करते थे डाक्टर ज्ञान सिंह मान। उनके पास बैठ कर बहुत सा नया ज्ञान मिलता था और मार्गदर्शन भी। फिर एक पत्रकार मित्र अजय कोहली भी इस क्षेत्र में काफी अनुभवी मिले। उन्हें तंत्र का भी अच्छा गया था। उन्होंने बहुत सी कठिन मुसीबतों का सामना इसी ज्ञान और शक्ति के आधार पर किया। इस तरह कई शुभचिंतक ज्ञानी जनों से चर्चा होती रही।
मेरी राशि मीन है लेकिन मुझे इसका कोई विशेष ज्ञान नहीं। इस चर्चा के दौरान जो जानकारी मिली वह काफी गहरी भी महसूस हुआ। इस जानकारी के मुताबिक 29 मार्च 2025 को शनि देव ने मीन राशि में प्रवेश किया और अब वह 3 जून 2027 तक इसी राशि (गुरु की राशि) में रहकर मीन राशि के जातकों को प्रभावित करेंगे। इस कहसेतर का ज्ञान कहता है कि यह समय मीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जो मानसिक अशांति, मेहनत में वृद्धि, आत्म-मंथन और करियर में चुनौतियों के साथ-साथ स्थिरता भी लाएगा। वैसे इसका अहसास होने भी लगा है। जो जो लोग स्वार्थ पूर्ण होने का रवैया दिखा थे और जेवल औपचारिकता निभाने तक रहने लगे थे। उनसे दूरी की भावना अब स्थिर दूरी जैसी बनने लगी है। उनसे कब मुलाकात हुई और कब नहीं इसका भी पता नहीं लगता।
मीन राशि पर शनि गोचर (2025-2027) का प्रभाव इतना गहरा होगा कभी सोचा नहीं था। नास्तिकता की वजह से इस तरफ कभी ध्यान दिया भी नहीं था। लेकिन अब लगता है कि देना चाहिए था। बहुत सी चीज़ें जब समझ में नहीं आती तो वे निरथर्क लगने लगती हैं। जब ु का महत्व पता चलता है तब तक समय और अवसर निकल चूका होता है। तब उस ज्ञान या उपलब्धि का भी कोई अर्थ नहीं रहता।
इसी चर्चा के दौरान करियर और मेहनत के मामले में भी बताया गया कि शनि के लग्न (प्रथम भाव) में होने से काम में मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। ऐसा हुआ भी। मेहनत तो करनी पड़ी लेकिन ऐसा भी मेहजसूस होने लगा कहैं यह मेहनत भी निरथर्क तो नहीं? इसी तथ्य जैसी बात के साथ यह भी बताया गया कि 2026 में मेहनत का फल भी मिलेगा। बस यही बात हैरानी वाली लगी क्यूंकि अतीत में बहुत बार ऐसा होता रहा की फल तो कोई और ही ले जाता था और मेहनत हम करते रह जाते। बहुत बार वह गीत याद आता---
सब कुछ सीखा हमने--न सीखी होशियारी---!
इसी तरह इसी विषय पर हुई चर्चा में कुछ कठिनाईयां आने के भी संकेत बताए गए। स्पष्ट कहा गया कि नौकरी और व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं लेकिन इनके परिणाम अच्छे ही रहेंगे। कठिनाई की भविष्यवाणी सुनने की तो अब आदत सी ही होने लगी थी लेकिंन अच्छे परिणाम की बात सुनने में ही अजीब लगी। हमारे मामले में अच्छा कब से होने लगा? सुन कर हंसी जैसा अहसास भी हुआ। बताने वाले को भी इसका आभास हो गया। लेकिन वह भी खामोश रहे।
जब ऐसी आशंका जताई तो साढ़ेसाती का विस्तार भी बताया गया। साफ़ कहा गया कि साढ़ेसाती का प्रभाव अभी रहेगा ही। इसके समापन की तारीख अभी दूर है अर्थात 8 अगस्त 2029 तक शनि की साढ़ेसाती रहेगी।इसलिए सावधान रहने की भी सलाह दी गई। बताया गया कि यह समय मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। मुझे यह सब सुन क्र भी हंसी आ गई। मित्रलोगों से बात करते करते ऐसे अनुभव हो भी जाते हैं। बताने वाले ने पूछा हँसे क्यूं? मैंने कहा बात ही हंसने वाली है क्यूंकि तनाव और भ्रम की स्थिति मेरे जीवन में कोई नई नहीं है। अक्सर ही ऐसा होता रहा। कभी हम पूर्णिमा के चांद को रोतो समझ लेते थे और कभी सुंदर लड़की का चेहरा जिसके हम किसी ज़माने में दीवाने रहे। दीवाने तो खैर अब भी हैं लेकिन अब फ़ाज़ली साहिब की शायरी में से ये पंक्तियाँ भी बहुत अच्छी लगने लगी हैं और इनकी हकीकत भी समझ आने लगी हैं कि
दूर के चांद को ढूंढो न किसी आँचल में!
यह उजाला नहीं आंगन में समाने वाला!
अब तो लगने लगा है कि अगर ज्योतिष अंतरिक्ष के ग्रहों की चाल है तो शायरी की उड़ान भी कोई कम नहीं होती। इसके ज़रिए भी अंतरिक्ष देखे जा सकते हैं। शायरी इन ग्रहों के मन में क्या चल रहा है या चलेगा इस रहस्य को भी पकड़ लाती हैं। शायरी की उड़ान भी इस से कम नहीं होती। अब यह बात अलग है की शायरी अभी तक अच्छा खासा पैसा कमाने वाला कारोबार नहीं बन स्की जबकि ज्योतिष इस मामले में काफी विकसित हो चूका है। कुछ मामलों में बात कुछ अलग भी हो सकती है लेकिन मानसिक उड़ान मह्त्वपूर्णत तो होती है।
एक बार एक ज्योतिष विशेषज्ञ महानुभाव से पूछा कि जेब की हालत कैसी रहेगी? हम सपने ही देखते रहेंगे या फिर सपनों को साकार भी कर पाएंगे? इस सवाल पर ज्योतिष ज्ञान से मुझे फिर सावधान किया गया कि आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी बल्कि बहुत अच्छी भी लेकिन धन का लेन-देन संतुलित तरीके से करना होगा। इस संतुलन को बिगाड़ने की सलाह देने वाले बहुत मिलेंगे। न ज़्यादा बात करना, न ही सुनना और न ही मानना। मन की बात सभी के साथ करने से बचना होगा। जितना कम बोलोगे उतना ही अच्छे रहोगे।
फिर सोचा कि पारिवारिक और निजी जीवन पर भी कुछ जान लिया जाए। जवाब मिला वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन धैर्य से रिश्ते में मजबूती आ सकती है। इस तरह का जवाब सुन कर भी हंसी आई क्यूंकि पत्नी का देहांत हुए कई बार्स हो चुके हैं। उसके बाद कौन सा परिवार और कौन सा वैवाहिक जीवन!
हां स्वास्थ्य में गड़बड़ियां चल रही थीं। हाई बीपी, शूगर और इससे सबंधित बहुत कुछ और भी। इस लिए इस पर पूछा तो ज्योतिष ज्ञाता मित्र ने साफ़ और सख्त शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य पर ध्यान देना अनिवार्य है, विशेष रूप से पैरों और नसों (वायु तत्व असंतुलन) से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। केतु परेशान भी कर सकता है और ब्भक्ति व् सन्यास का मार्ग भी दिखा सकता है। इसी चर्चा के दौरान एक रहस्य पता चला कि बिगड़े हुए इंसान को कई बार केतु महाराज इतनी चिंता में डालते हैं कि बिगड़ा इंसान तंग हो कर सीधे रास्ते पर आने लगता है। उसके सब बल निकल जाते हैं। उस बिगड़े हुए इंसान को सीधे मार्ग पर चला कर सही राह पर ले आते हैं केतु महाराज। इतना सीधा करते हैं कि बिगड़े हुए इंसान को स्वयं ही उचित लगने लगता है। वह सिगरेट, शराब और अन्य बुराइयां छोड़ कर अच्छाईयां अपनाने लगता है।
साढ़ेसाती के इस दुसरे और चुनौतीपूर्ण चरण का सामना करने के लिए दान दक्षिणा की जानेवाली चीज़ें भी बताई गई लेकिन एक सलाह बहुत ज़बरदस्त रही कि कभी भी जीवनशैली में कमज़ोरी मत दिखाना। मेहनत से पीछे न हटना और तनाव लेने से कभी भी बचने की कोशिश करना। हर चुनौती को स्वीकार करना लेकिन कूटनीति का साथ मत छोड़ना।
इसी मकसद के लिए अर्थात साढ़ेसाती और अन्य मुश्किलों का सामना करने के लिए मेडिटेशन और पूजा पाठ करना भी बहुत अच्छा बताया गया। सलाह यह दी गई कि भगवान शिव या विष्णु जी की आराधना करें तो यह अधिक शुभ रहेगी। भगवान शिव से तो बचपन से ही एक विशेष स्नेह रहा है। वह ज़िंदगी में बहुत सी मुश्किलों का सामना करने की शक्ति भी देते रहे हैं और इसका आभास होता रहा। इसी बहाने भगवन शिव का समरण अधिक किया जा सकेगा।
ज्योतिष विज्ञान पर कुछ मित्रों से हुई चर्चा में एक और महत्वपूर्ण तथ्य बताया गया कि जिस शनि से सभी लोग डरते हैं वह बहुत न्यायप्रिय है। इस बार्स अर्थात 2026 में शनि का मीन राशि में ही बने रहना, उन लोगों के लिए बहुत ख़ास भी बनेगा जो रचनात्मक या आध्यात्मिक क्षेत्रों में हैं। उनके लिए आत्म-विकास का अवसर भी लेकर आएगा। ऐसे अवसर जो बिलकुल नई दुनिया सामने लाएंगे। ऐसी दुनिया जिसकी चमक डंक देख कर आप ही नहीं सभी हैरान रह जाएंगे।
बहुत सी बातें और बहुत से तथ्य ऐसे रहे जिन पर इस पोस्ट में चर्चा नहीं की जा स्की। कोशिश रहेगी उन पर एक अलह विस्तृत चर्चा अलगे पोस्ट में की जा सके। -मीडिया लिंक आर के तारेश

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