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Saturday, February 7, 2026

युवक केवल एक मीडिया हाऊस ही नहीं.....

Drafted//Edited //Submitted on Thursday 5th February 2026 at 09:45 PM By Rector Kathuria 

"युवक" सामाजिक तब्दीली का ज़ोरदार आंदोलन भी रहा 

लुधियाना: 6 फरवरी 2026: (रेक्टर कथूरिया//मुझे याद है ज़रा ज़रा--डेस्क):: 

उम्र हाथ से निकलती जा रही है। जिस्म भी ढलता जा रहा है। बुढ़ापे में बहुत कुछ भूलता भी है और बहुत कुछ शिद्द्त से याद भी आता है। आज याद आने वालों में बहुत से लोग भी हैं और संस्थान भी। बहुत से स्थान भी अक्सर याद आते हैं। फ़िलहाल मोहतरमा अंजुम रहबर साहिबा की पंक्तियाँ याद आ रही हैं जिनमें ज़िंदगी के कड़वी सच्चाई को बहुत ही खूबसूरती से दुनिया के सामने रखा गया है।  लगता है जिंदगी मिलना बिछड़ना एक ही खेल के दो पहलू है। इनके चलते ही संसार आगे बढ़ता है। इसी के साथ ही इस दुनिया कविता,साहित्य और गीत संगीत में रस पैदा होता है। इसको समझने की कोशिश करें तो प्रकृति के रहस्यों की भी समझ आने लगती है। 

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था

वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था!

बहुत से लोग छूट गए जो दिल के बेहद करीब भी थे। बहुत से लोग चल बसे कभी उम्र बहाना बनी ,  कभी कोई सड़क हादसा और कभी कोई बिमारी। बहुत से लोग किसी न  किसी गलतफहमी या नाराज़गी की वजह से दूर हो गए। कुछ बहुत ही प्रिय मित्र और संसथान समय की धुल में आंखों से ओझल हो गए। इन्हीं में से एक मीडिया संस्थान भी था। वास्तव में यह एक लोकप्रिय पत्र था जिसका नाम था 'युवक"। यह साप्ताहिक भी था और मासिक भी। इसका साप्ताहिक अंक टेबलायड अकार का होता था। छोटे आकार के पृष्ठों वाला अख़बार लेकिन इसकी लोकप्रियता भी बहुत थी जबकि मासिक अंक एक पूर्ण पत्रिका की तरह था।  

जब देश में आपातकाल का दौर था। समाज में बहुत ज़्यादा बेचैनी थी। युवा वर्ग में आक्रोश भी था। पंजाब में उस समय पंजाबी पत्रकारिता में बहुत कुछ हो भी रहा था। नक्सलवाद के हक़ में भी बहुत सी पत्रिकाएं निकलने लगी थी। उस समय आगरा से निकलने वाले मासिक पत्र युवक से भी संपर्क हुआ। पंजाब में युवा आंदोलन भी चल रहे थे और बेरोज़गारी के खिलाफ भी बेचैनी काफी थी। 

पंजाब वालों को कई बार लगता था कि असहाय और पीड़ित वर्गों की आवाज़ शायद पंजाब के  लोग ही उठाते हैं और वह भी पंजाबी में ही लेकिन आगरा से प्रकाशित पत्रिका युवक इस संबंध में सभी गलतफहमियों को दूर कर रही थी।  मासिक पत्रिका "युवक" ने देश और दुनिया के हर पीड़ित वर्ग की आवाज़ उठाई। इस तरह की विशेष कवरेज के चलते ही युवक परिवार से संपर्क जुड़ा जो समय के साथ साथ गहरा होता चला गया। लुधियाना और आगरा में उस समय बहुत बड़ी दूरी लगती थी लेकिन दिल, दिमाग और विचार मिले हुए थे। सत्तर के दशक में युवक परिवार से संपर्क बना जो काफी देर तक चला लेकिन अस्सी वाले दशक के मध्य में जब पंजाब के हालात खराब हुए तो फिर संपर्क में रुकावट आई। उस समय बहुत संबंधों में अंतराल आ गया। फिर हमलोगों को एकदूसरे की खबर भी न रही लेकिन हम लोगों का आपसी वैचारिक प्रेम दिल में बसा हुआ था। युवक पत्रिका के मासिक अंक और साप्ताहिक पत्र-दोनों में ही प्रेमदत्त पालीवाल जी ने बहुत सम्मान से प्रकाशित किया।  

इसके कुछ बाद तकनीक ने भी नई करवट ली। आम डाक की जगह कुरियर और ईमेल आ गई।  लेकिन युवक के साथ संबंध तब का जब हम लोग अपनी रचना लिख कर लिफाफे में बंद करते। उस पर टिकट लगाते और नज़दीक के लेटर बॉक्स में दाल आते। पंजाब से आगरा भेजी रचना डाक द्वारा पहुँचने में दो-तीन दिन लग भी जाते।रचना प्रकाशित होने में भी समय लगता। जब प्रकाशित रचना वाला अंक आता तो हम सभी ,लोगों को बहुत ख़ुशी होती। 

हालात के चलते युवक पत्रिका के दर्शन में देरी बढ़ने लगी। उस दौर में पंजाब के मीडिया ने भी बहुत कठिनाईओं का दौर देखा। बहुत बार मन में आता आगरा जा कर युवक परिवार से मिला जाए। दक्षिण भारत के यात्राओं पर आते जाते जब आगरा रास्ते में आता तो मन होता सफर बीच में ही छोड़ कर यहीं कुछ देर रुका जाए लेकिन साथ में कुछ लोग भी हुआ करते और हम लोग किसी न किसी विशेष आयोजन पर जा रहे होते। रेल की टिकट भी आरक्षित रहती। इस लिए आगरा से गुज़रते हुए भी युवक परिवार से भेंट करना हर बार छूट जाता। हाँ कल्पना में  ज़रूर होती रही। 

एक दिन इंटरनेट पर सर्च करते करते "युवक" पत्रिका भी मिली। इस परिवार के सदस्यों से फोन वार्ता भी होने लगी। और भूले बिसरे संबंध फिर से ताज़ा हो गए। आगरा से सबंधित और कलमकार भी मिलने लगे और सोशल मीडिया के साथी भी। अब बनाते हैं इस युवक पत्रिका परिवार से मिलने का विशेष कार्यक्रम। 

"युवक" पत्रिका केवल एक मीडिया हाऊस बन कर ही नहीं बल्कि एक आंदोलन के तरह चलता रहा। इस पत्रिका के सूत्र बताते हैं कि वह एक ऐतिहासिक समय था। गौरतलब है कि जिन दिनों भारतीय स्वतंत्रता संग्राम नई ऊंचाईयां छू रहा था उन दिनों महात्मा गांधी जी के नेतृत्व मे इस आंदोलन ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए। आम जनता के दिल दिमाग में देश प्रेम की ज्वाला प्रज्वलित करना आसान भी नहीं था। उस समय उत्तर प्रदेश को United Provinces - 1937 से 1950 तक कहा जाता था। कुछ सूत्रों के कहना है कि United Provinces ऑफ अवध ऐंड आगरा। राजधानी लखनऊ ही थी। 

वास्तव में यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ अवध ऐंड आगरा (संयुक्त प्रांत), ब्रिटिश भारत के समय आगरा प्रेसिडेंसी और अवध को मिलाकर 1902 में बनाया गया एक प्रमुख प्रांत था, जिसे 1935 में छोटा करके 'यूनाइटेड प्रोविंस' कहा गया। 24 जनवरी 1950 को इसका नाम बदलकर उत्तर प्रदेश (UP) कर दिया गया, जो आधुनिक भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य बना। 

इसका गठन और विस्तार इतिहास का विशेष भाग रहे। बरस 877 में इसे अवध और उत्तर-पश्चिमी प्रांतों को मिलाकर बनाया गया, जिसे 1902 में आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध नाम दिया गया। इस भूमि पर बहुत से ऐतिहासिक कार्य होते रहे। 

इसकी राजधानी शुरुआत में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) थी, लेकिन 1921 में इसे लखनऊ स्थानांतरित कर दिया गया। यह भी एक विशेष ऐतिहासिक घटना रही। धर्म कर्म और अन्य सांस्कृतिक कारणों से भी इलाहाबाद (अब प्रयागराज) का विशेष महत्व हमेशां बना रहा। 

इसके बाद इसके प्रदेश के नाम में बदलाव भी आया। फिर सन 1935 में इसका नाम संक्षिप्त रूप से 'यूनाइटेड प्रोविंस' (संयुक्त प्रांत) कर दिया गया और अंततः 24 जनवरी 1950 को यह उत्तर प्रदेश बन गया। इसे ही आजकल हम यूपी के नाम से जानते हैं। 

यहां का प्रशासन भी बहुत अच्छा चलने लगा। इस क्षेत्र में तत्कालीन ऊपरी गंगा घाटी के क्षेत्र शामिल थे और इसका प्रशासन एक लेफ्टिनेंट-गवर्नर के अधीन था। यह प्रांत ब्रिटिश शासन के दौरान एक प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करता था। 

यहां अर्थात उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता का संग्राम भी चला और साहित्य का आंदोलन भी। कलम के क्षेत्र में भी प्रमुख नेताओं में श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल जी एक प्रमुख नेता माने जाते थे। आगरा स्थित उनका निवास इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया था। इसी परिवार में उनके यशस्वी भतीजे श्री प्रेमदत्त पालीवाल भी एक वरिष्ठ राजनेता, पत्रकार और प्रखर राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी के रूप में भी प्रसिद्ध हुए। श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल जी के संपादकत्व में जहाँ “सैनिक ” जैसा प्रखर राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित हुआ, जिसमें स. ही.  वात्सयायन “अग्येय” जैसे दिग्गज लोग संपादक रहे और तत्कालीन हिंदी जगत के सभी बड़े लेखकों के लेख, कविताएं एवं स्वाधीनता संग्राम से संबंधित रचनाएं प्रकाशित हुईं थीं,।आचार्य श्रीराम शर्मा और अक्षय कुमार जैन जैसे दिग्गज लोगों ने सैनिक का संपादन किया है। भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी ने इसमें लेख लिखे है जिनकी चर्चा भी होती रही। यह मीडिया हाऊस निरंतर विकास भी करता रहा। देश के साथ और देश की जनता के साथ "युवक" मीडिया हाऊस ने भी कदम बढ़ाए। देश के युवाओं को भी एकजुट करने में सक्रीय काम किया।  

सन 1951 एक ऐतिहासिक बरस रहा जब श्री प्रेमदत्त पालीवाल जी ने “युवक ” नाम से एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया। यह इस मीडिया संस्थान में एक विशेष उपलब्धि थी। युवक पत्रिका के प्रकाशन के पीछे स्पष्ट ध्येय युवा वर्ग को राष्ट्रीय भावना से जोड़ना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना भी था। युवक परिवार इस मकसद में काफी हद तक सफल भी रहा। बिना किसी शोरशराबे के युवक परिवार ने लगातार ठोस कार्य किया। बहुत से युवक अपनी कला और कलम के साथ "युवक" से जुड़े। 

साहित्यिक क्षेत्र के साथ साथ राजनीति के मैदान में भी यह परिवार अग्रसर रहा। विशेष उल्लेखनीय बात यह थी कि श्री प्रेमदत्त पालीवाल जी युवक कांग्रेस के संस्थापक सदस्य भी थे और उन दिनों कांग्रेस की विचार धारा से युवाओं को जोड़ना एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी का काम समझा जाता था। कांग्रेस की नीतियां उन दिनों बहुत तेज़ी से समाज और युवा वर्ग को लुभा रही थी। वाम और कांग्रेस भी एक दुसरे के बहुत नज़दीक थे। 

वैसे, पालीवाल परिवार गांधीवाद से प्रभावित होने के बावजूद, गरमदल के लोगों को अधिक महत्व देते थे। ” युवक”पत्रिका ने भी अपने समय में अपार ख्याति प्राप्त की और इस में भी अपने समय के सभी श्रेष्ठ साहित्यकारों, कवियों, लेखकों की रचनाएं निरंतर छपती रहीं। यह भी कहा जाता है कि अनेक लेखकों ने तो अपना कैरियर ही युवक पत्रिका से शुरू किया। दिलचस्प बात कि युवक में लिखने वाले लोग केवल शायर या लेखक ही नहीं थे बल्कि राजनीति में भी खुल कर अपनी नीतियों और आदर्शों के लिए सक्रिय थे। जब वे युवक में रचना लिखते तो कई बार उनके संपर्क का पता भी साथ छपा होता। एक बार में लखनऊ गया तो वह थोड़ी देर के लिए रुकना था। एक जानेमाने लेखक थे जो बहुत तीखा लिखते थे। मैनें दिए गए पते पर मिलना चाहा तो तीन अलग अलग लोगों ने मुझे एक सब्ज़ी विक्रेता के पास भेजा। उसने बताया कि जिनको आप ढून्ढ रहे हैं वह तो आजकल अज्ञातवास में हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। 

कुछ घंटों के बाद सब्ज़ी वाले उसी गुप्त "डाकखाने" पर दोबारा संपर्क हुआ तो सबंधित मित्र से भेंट भी हुई। मुझसे बड़ी उम्र के और जोशीले लेखक भी थे और नेता भी। आपातकाल चल रहा था। इस लिए वह भी अज्ञातवास में थे। उनसे मिल कर मुझे अहसास हुआ कि "युवक" के लेखक केवल कलमकार नहीं बल्कि ज़मीनी आंदोलनों से जुड़े सक्रिय नेता भी हैं। अज्ञातवास की कठिनाईयां या पुलिस के छापे उन्हें  डरा नहीं पाते। 

यह तो खैर अतीत था युवक की चर्चा करते करते और अब वर्तमान में भी इस आंदोलन को "युवक" परिवार ने और भी ज़ोरदार बनाया है। इस मीडिया हाऊस की धार और भी तेज़ हुई है। भविष्य की योजनाएं भी बहुत अच्छी हैं। जल्द ही आपको "युवक" नए रंग और नए तेवर भी नज़र आएंगे।   

                                                      -------------रेक्टर कथूरिया 

Saturday, January 10, 2026

शनि की साढ़ेसाती कई रंगों में काफी कुछ दिखा सकती है

Blog Media Link on 10th January 2026 at 02:30 Regarding Astrology about Saturn 7.5 years

लेकिन हर चुनौती के सामने डटे रहना-पीछे मत हटना 


खरड़
(मोहाली) चंडीगढ़:10 जनवरी 2026: (मीडिया लिंक//आर के तारेश//यादें//मुझे याद है ज़रा ज़रा)):: 

ज़िंदगी की हर सुबह कई बार उमीदों से भरी होती है और कई बार निराशा के अंधेरों से। जिस दिन उम्मीद रौशन होती है उस दिन तन मन में एक उत्साहपूर्ण उड़ान उठने लगती है। जिस दिन निराशा का अंधेरा हो उस दिन बिस्तर से उठने का भी मन नहीं होता। बस यही लगता है कि उठ कर भी क्या करेंगे? कहां जाऐंगे? निराशा वाले दिन उठना भी पड़े तो बस मजबूरी में ही उठना होता है। इसके कारणों पर सोचा तो बहुत सी बातें मन में आईं। इस चिंतन में चलते चलते ज्योतिष के नज़रिये से ग्रह चाल देखने का भी मन किया। बात उठी दिमाग में भी और मन में भी। मन की बात तो ठीक लगती पर इस चाल को देखने और समझने की अक्ल कहां से लाते? ज्योतिष के  ज्ञान विज्ञान को समझना समझाना इतना सहज भी नहीं होता। 

ग्रह चाल पर दृष्टि डालने के लिए कुछ जानकार मित्रों से भी चर्चा की और गूगल बाबा से  भी गुजारिश की। बहुत पहले एक विद्वान मित्र हुआ करते थे डाक्टर ज्ञान सिंह मान। उनके पास बैठ कर बहुत सा नया ज्ञान मिलता था और मार्गदर्शन भी। फिर एक पत्रकार मित्र अजय कोहली भी इस क्षेत्र में काफी अनुभवी मिले। उन्हें तंत्र का भी अच्छा गया था। उन्होंने बहुत सी कठिन मुसीबतों का सामना इसी ज्ञान और शक्ति के आधार पर किया। इस तरह कई शुभचिंतक ज्ञानी जनों से चर्चा होती रही। 

मेरी राशि मीन है लेकिन मुझे इसका कोई विशेष ज्ञान नहीं। इस चर्चा के दौरान जो जानकारी मिली वह काफी गहरी भी महसूस हुआ।  इस जानकारी के मुताबिक 29 मार्च 2025 को शनि देव ने मीन राशि में प्रवेश किया और अब वह 3 जून 2027 तक इसी राशि (गुरु की राशि) में रहकर मीन राशि के जातकों को प्रभावित करेंगे। इस कहसेतर का ज्ञान कहता है कि यह समय मीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जो मानसिक अशांति, मेहनत में वृद्धि, आत्म-मंथन और करियर में चुनौतियों के साथ-साथ स्थिरता भी लाएगा। वैसे इसका अहसास होने भी लगा है। जो जो लोग स्वार्थ पूर्ण होने का रवैया दिखा थे और जेवल औपचारिकता निभाने तक रहने लगे थे। उनसे दूरी की भावना अब स्थिर दूरी जैसी बनने लगी है। उनसे कब मुलाकात हुई और कब नहीं इसका भी पता नहीं लगता। 

मीन राशि पर शनि गोचर (2025-2027) का प्रभाव इतना गहरा होगा कभी सोचा नहीं था। नास्तिकता की वजह से इस तरफ कभी ध्यान दिया भी नहीं था। लेकिन अब लगता है कि देना चाहिए था। बहुत सी चीज़ें जब समझ में नहीं आती तो वे निरथर्क लगने लगती हैं। जब ु का महत्व पता चलता है तब तक समय और अवसर निकल चूका  होता है। तब उस ज्ञान या उपलब्धि का भी कोई अर्थ नहीं रहता। 

इसी चर्चा के दौरान करियर और मेहनत के मामले में भी बताया गया कि शनि के लग्न (प्रथम भाव) में होने से काम में मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। ऐसा हुआ भी। मेहनत तो करनी पड़ी लेकिन ऐसा भी मेहजसूस होने लगा कहैं यह मेहनत भी निरथर्क तो नहीं? इसी तथ्य जैसी बात के साथ यह भी बताया गया कि 2026 में मेहनत का फल भी मिलेगा। बस यही बात हैरानी वाली लगी क्यूंकि अतीत में बहुत बार ऐसा होता रहा की फल तो कोई और ही ले जाता था और मेहनत हम करते रह जाते। बहुत बार वह गीत याद आता---

सब कुछ सीखा हमने--न सीखी होशियारी---!

इसी तरह इसी विषय पर हुई चर्चा में कुछ कठिनाईयां आने के भी संकेत बताए गए। स्पष्ट कहा गया कि नौकरी और व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं लेकिन इनके परिणाम अच्छे ही रहेंगे। कठिनाई की  भविष्यवाणी सुनने की तो अब आदत सी ही होने लगी थी लेकिंन अच्छे परिणाम की बात सुनने में ही अजीब लगी। हमारे मामले में अच्छा कब से होने लगा? सुन कर हंसी जैसा अहसास भी हुआ। बताने वाले को भी इसका आभास हो गया। लेकिन वह भी खामोश रहे। 

जब ऐसी आशंका जताई तो साढ़ेसाती का विस्तार भी बताया गया। साफ़ कहा गया कि साढ़ेसाती का प्रभाव अभी रहेगा ही। इसके समापन की तारीख अभी दूर है अर्थात 8 अगस्त 2029 तक शनि की साढ़ेसाती रहेगी।इसलिए सावधान रहने की भी सलाह दी गई। बताया गया कि यह समय मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। मुझे यह सब सुन क्र भी हंसी आ गई। मित्रलोगों से बात करते करते ऐसे अनुभव हो भी जाते हैं। बताने वाले ने पूछा हँसे क्यूं? मैंने कहा बात ही हंसने वाली है क्यूंकि तनाव और भ्रम की स्थिति मेरे जीवन में कोई नई नहीं है। अक्सर ही ऐसा होता रहा। कभी हम पूर्णिमा के चांद को रोतो समझ लेते थे और कभी सुंदर लड़की का चेहरा जिसके हम किसी ज़माने में दीवाने रहे। दीवाने तो खैर अब भी हैं लेकिन अब  फ़ाज़ली साहिब की शायरी में से ये पंक्तियाँ भी बहुत अच्छी लगने लगी हैं और इनकी हकीकत भी समझ आने लगी हैं कि 

दूर के चांद को ढूंढो न किसी आँचल में!

यह उजाला नहीं आंगन में समाने वाला!

अब तो लगने लगा है कि अगर ज्योतिष अंतरिक्ष के ग्रहों की चाल है तो शायरी की उड़ान भी कोई कम नहीं होती। इसके ज़रिए भी अंतरिक्ष देखे जा सकते हैं। शायरी इन ग्रहों के मन में क्या चल रहा है या चलेगा इस रहस्य को भी पकड़ लाती हैं। शायरी की उड़ान भी इस से कम नहीं होती। अब यह बात अलग है की शायरी अभी तक अच्छा खासा पैसा कमाने वाला कारोबार नहीं बन स्की जबकि ज्योतिष इस मामले में काफी विकसित हो चूका है। कुछ मामलों में बात कुछ अलग भी हो सकती है लेकिन मानसिक उड़ान मह्त्वपूर्णत तो होती है।  

एक बार एक ज्योतिष विशेषज्ञ महानुभाव से पूछा कि जेब की हालत कैसी रहेगी? हम सपने ही देखते रहेंगे या फिर सपनों को साकार भी कर पाएंगे? इस सवाल पर ज्योतिष ज्ञान से मुझे फिर सावधान किया गया कि आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी बल्कि बहुत अच्छी भी लेकिन धन का लेन-देन संतुलित तरीके से करना होगा। इस संतुलन को बिगाड़ने की सलाह देने वाले बहुत मिलेंगे। न ज़्यादा बात करना, न ही सुनना और न ही मानना। मन की बात सभी के साथ करने से बचना होगा। जितना कम बोलोगे उतना ही अच्छे रहोगे। 

फिर सोचा कि पारिवारिक और निजी जीवन पर भी कुछ जान लिया जाए। जवाब मिला वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन धैर्य से रिश्ते में मजबूती आ सकती है। इस तरह का जवाब सुन कर भी हंसी आई क्यूंकि पत्नी का देहांत हुए कई बार्स हो चुके हैं। उसके बाद कौन सा परिवार और कौन सा वैवाहिक जीवन!

हां स्वास्थ्य में गड़बड़ियां चल रही थीं। हाई बीपी, शूगर और इससे सबंधित बहुत कुछ और भी। इस लिए इस पर पूछा तो ज्योतिष ज्ञाता मित्र ने साफ़ और सख्त शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य पर ध्यान देना अनिवार्य है, विशेष रूप से पैरों और नसों (वायु तत्व असंतुलन) से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। केतु परेशान भी कर सकता है और ब्भक्ति व् सन्यास का मार्ग भी दिखा सकता है। इसी चर्चा के दौरान एक रहस्य पता चला कि बिगड़े हुए इंसान को कई बार केतु महाराज इतनी चिंता में डालते हैं कि बिगड़ा इंसान तंग हो कर सीधे रास्ते पर आने लगता है। उसके सब बल निकल जाते हैं। उस बिगड़े हुए इंसान को सीधे मार्ग पर चला कर सही राह पर ले आते हैं केतु महाराज। इतना सीधा करते हैं कि बिगड़े हुए इंसान को स्वयं ही उचित लगने लगता है। वह सिगरेट, शराब और अन्य बुराइयां छोड़ कर अच्छाईयां अपनाने लगता है।  

साढ़ेसाती के इस दुसरे और चुनौतीपूर्ण चरण का सामना करने के लिए दान दक्षिणा की जानेवाली चीज़ें भी  बताई गई लेकिन एक सलाह बहुत ज़बरदस्त रही कि कभी भी जीवनशैली में कमज़ोरी मत दिखाना। मेहनत से पीछे न हटना और तनाव लेने से कभी भी बचने की कोशिश करना। हर चुनौती को स्वीकार करना लेकिन कूटनीति का साथ मत छोड़ना। 

इसी मकसद के लिए अर्थात साढ़ेसाती और अन्य मुश्किलों का सामना करने के लिए मेडिटेशन और पूजा पाठ करना भी बहुत अच्छा बताया गया। सलाह यह दी गई कि भगवान शिव या विष्णु जी की आराधना करें तो यह अधिक शुभ रहेगी। भगवान शिव से तो बचपन से ही एक विशेष स्नेह रहा है। वह ज़िंदगी में बहुत सी मुश्किलों का सामना करने की शक्ति भी देते रहे हैं और इसका आभास  होता रहा। इसी बहाने भगवन शिव का समरण अधिक किया जा सकेगा। 

ज्योतिष  विज्ञान  पर कुछ मित्रों से हुई चर्चा में एक और महत्वपूर्ण तथ्य बताया गया कि जिस शनि से सभी लोग डरते हैं वह बहुत न्यायप्रिय है। इस बार्स अर्थात 2026 में शनि का मीन राशि में ही बने रहना, उन लोगों के लिए बहुत ख़ास भी बनेगा जो रचनात्मक या आध्यात्मिक क्षेत्रों में हैं। उनके लिए आत्म-विकास का अवसर भी लेकर आएगा। ऐसे अवसर जो बिलकुल नई दुनिया सामने लाएंगे। ऐसी दुनिया जिसकी चमक डंक देख कर आप ही नहीं सभी हैरान रह जाएंगे। 

बहुत सी बातें और बहुत से तथ्य ऐसे रहे जिन पर इस पोस्ट में चर्चा नहीं की जा स्की। कोशिश रहेगी उन पर एक अलह विस्तृत चर्चा अलगे पोस्ट में की जा सके।  -मीडिया लिंक आर के तारेश